Thursday, August 25, 2011

वर्षा

जब मेघ गरजते हैं आकाश मे,
हृदय सपन्दित हो जाता है,
वर्षा की आशा में कर,
दुआएं मांगनें लगते है॥

बरसी होगी जब पहली बूंद,
करतल में मोती की तरह,
हृदय झंकृत हुआ तारों सा,
सुर की लहरिया बरसती है॥

नाच उठे धरनि के रोयें,
कोयल राग सुनाती है,
हलधर हल को कन्धे रखकर,
कर्मभूमि चल देता है॥

जीवन में परिवर्तन का चक्र,
यूं ही चलता जाता है,
जब जब आती है वर्षा,
नया रंग बिखराती है॥

(श्रुंगेरी, कर्णाटक) 25.08.2011

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